श्राद्ध कैसे और कब करना चाहिए आश्विन कृष्ण पक्ष एवं वार्षिक श्राद्ध के लिए सबसे पहले हमें पितरों की मोक्ष तिथि का ज्ञान होना आवश्यक होता है । अतः जिस समय जीवात्मा ने इस पार्थिव शरीर का त्याग किया, जो तिथि उस समय होती है, वही मोक्ष तिथि कहलाती हैं। अतः हमने अपने पितरों के लिए जो भी श्राद्ध करना, तर्पण दान इत्यादि करना है, वह सब मोक्ष तिथि के अनुसार ही करना चाहिए। मरणोपरांत से लेकर वार्षिक श्राद्ध होने के बाद हम अपने पितरों के लिए संक्रांति के दिन, अक्षय तृतीया, अक्षय नवमी, गंगा दशहरा, गंगा जयंती, पितरों के मोक्ष तिथि के दिन, दीपावली, दशहरा, अक्षय मकर संक्रांति, सोमवती अमावस्या, सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण के समय महाविषुव दिन (महाविषुव दिन उसे कहते हैं जिस दिन, दिन और रात बराबर होते हैं) भी श्राद्ध कर सकते हैं। जो लोग श्राद्ध नहीं करते हैं, अज्ञातवास में श्राद्ध ना करना, या जानबूझकर जो श्राद्ध नहीं करते हैं, और शास्त्र के अनुसार श्राद्ध नहीं करते हैं, शास्त्र समय अनुसार, शास्त्र की आज्ञा अनुसार जो श्राद्ध नहीं करते हैं, उनके पितृदेव ...
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