Skip to main content

Posts

श्राद्ध कैसे और कब करना चाहिए

श्राद्ध कैसे और कब करना चाहिए  आश्विन कृष्ण पक्ष एवं वार्षिक  श्राद्ध के लिए सबसे पहले हमें पितरों की मोक्ष तिथि का ज्ञान होना आवश्यक होता है । अतः जिस समय जीवात्मा ने इस पार्थिव शरीर का त्याग किया, जो तिथि उस समय होती है,  वही मोक्ष तिथि कहलाती हैं। अतः हमने अपने पितरों के लिए जो भी श्राद्ध करना, तर्पण दान इत्यादि करना है, वह सब मोक्ष तिथि के अनुसार ही करना चाहिए। मरणोपरांत से लेकर वार्षिक श्राद्ध होने के बाद हम अपने पितरों के लिए संक्रांति के दिन, अक्षय तृतीया, अक्षय नवमी, गंगा दशहरा, गंगा जयंती, पितरों के मोक्ष तिथि के दिन, दीपावली, दशहरा, अक्षय  मकर संक्रांति, सोमवती अमावस्या, सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण के समय  महाविषुव दिन  (महाविषुव दिन उसे कहते हैं जिस दिन, दिन और रात बराबर होते हैं) भी श्राद्ध कर सकते हैं।  जो लोग श्राद्ध नहीं करते हैं, अज्ञातवास में श्राद्ध ना करना, या जानबूझकर जो श्राद्ध नहीं करते हैं, और शास्त्र के अनुसार श्राद्ध नहीं करते हैं, शास्त्र समय अनुसार, शास्त्र की आज्ञा अनुसार जो श्राद्ध नहीं करते हैं, उनके पितृदेव ...
Recent posts
                               पंचको में क्या करे और क्या न करे....
आज ३०/०५/२०१८ को पहली बार ब्लॉग में आया हूं।  इस ब्लॉग में सबसे पहली पोस्ट मैं भगवान गणपति जी का ध्यान और सदगुरुदेव जी का ध्यान करता हूं----  ।।   श्रीगणपतिजी की वंदना  ।।  ॐ गजाननं भूतगणादिसेवितं, कपित्थजंबूफलचारुभक्षणम्  । उमासुतंशोकविनाशकारकं,   नमामिविघ्नेश्वर पादपंकजं ।।    ।।  श्रीगुरुदेव जी की वंदना  ।।  ॐ   गुरूर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु देवो महेश्वरा।  गुरु साक्षात परमब्रहमा तस्मे श्रीगुरुवेनमः।।      ।।  श्री पंच परमेश्वरों की वंदना  ।।  ॐ  गणनाथ सरस्वती रवि शुक्र बृहस्पति।  पंचैतान स्मृतेनित्यं वेदवाणी प्रवर्तते।।